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अस्पताल की छत पर खुले आसमान के नीचे पड़ा लाखों का सामान, बारिश में बर्बादी का खतरा

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गद्दे, स्ट्रेचर, कुर्सियां, व्हीलचेयर और बेड बने कबाड़, पानी की टंकियों के ढक्कन भी खुले 

अस्पताल में पानी की टंकी का ढक्कन गायब, मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर उठे सवाल

हेमन्त कुमार श्रीवास्तव/ओम मिश्रा

श्रावस्ती। सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता का दावा करती है, लेकिन श्रावस्ती के संयुक्त जिला चिकित्सालय में तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर रही है। अस्पताल की छत पर मरीजों के उपयोग में आने वाला कीमती सामान खुले आसमान के नीचे पड़ा है और बरसात के पानी में खराब होने की आशंका बनी हुई है।अस्पताल की छत पर गद्दे, स्ट्रेचर, कुर्सियां, व्हीलचेयर, बेड समेत अन्य सामान खुले में रखा दिखाई दे रहा है। बारिश और मौसम की मार से इस सामान के खराब होने का खतरा है। सवाल यह है कि जब अस्पताल में मरीजों को सुविधाओं की जरूरत है तो मरीजों के लिए आया सामान इस तरह लापरवाही से क्यों रखा गया है?

मरीजों की सुविधा का सामान ही लापरवाही की भेंट

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सामान की खरीद और आपूर्ति पर सरकारी धन खर्च होता है। बताया जाता है कि अस्पतालों में विभिन्न चिकित्सा उपकरण और सामग्री एनएचआरएम/राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के तहत उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में यदि सामान का उपयोग करने के बजाय उसे खुले में छोड़ दिया जाए और वह खराब हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?एक तरफ अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों को सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ उपलब्ध संसाधनों के संरक्षण पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

 पानी की टंकियों के ढक्कन खुले, संक्रमण का खतरा

अस्पताल परिसर में मरीजों और स्टाफ के लिए पानी उपलब्ध कराने वाली टंकियों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली बताई जा रही है। कई टंकियों के ढक्कन खुले पड़े होने से उनमें धूल, गंदगी और अन्य बाहरी तत्व जाने की आशंका बनी रहती है।स्वास्थ्य संस्थान में पेयजल की स्वच्छता बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में खुले ढक्कन वाली पानी की टंकियां मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। सवाल उठता है कि अस्पताल प्रशासन इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी क्यों नहीं कर रहा?


डॉक्टर स्वच्छ पानी पीने की देते हैं सलाह, अस्पताल में खुद खुली पड़ी पानी की टंकी

जहां चिकित्सक मरीजों और आमजन को हमेशा स्वच्छ एवं सुरक्षित पानी पीने की सलाह देते हैं, वहीं अस्पताल परिसर में ही पानी की टंकी का ढक्कन गायब होना स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए यही पानी उपयोग में लिया जाता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब पानी की टंकी ही खुले में पड़ी हो तो उसमें संग्रहित पानी मरीजों के लिए कितना सुरक्षित और स्वच्छ होगा?दूषित पानी विभिन्न प्रकार के संक्रमण और जलजनित बीमारियों का कारण बन सकता

है। खासकर अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए स्वच्छ पानी और बेहतर साफ-सफाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद पानी की टंकी का ढक्कन गायब होना जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।

जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल

सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है। लेकिन सरकारी अस्पताल में लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से उपलब्ध कराए गए संसाधनों के संरक्षण में यदि लापरवाही होती है तो फिर जिम्मेदारी तय कौन करेगा?यह मामला सिर्फ सामान के खुले में पड़े होने का नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के रखरखाव, मरीजों की सुविधाओं और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा है।

जिम्मेदारियों के प्रति सजगता जरूरी 

सरकारी वस्तुओं के प्रति लापरवाही केवल किसी सामान की बर्बादी नहीं है, बल्कि जनता के धन और सार्वजनिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की अनदेखी है। सरकारी भवन, वाहन, फर्नीचर, उपकरण, अस्पताल की सामग्री या अन्य संसाधन जनता के करों से उपलब्ध होते हैं। इसलिए इनके रखरखाव और उचित उपयोग की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की होती है।जिस व्यक्ति को सरकारी संसाधनों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है, उसका दायित्व केवल उनका उपयोग करना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, संरक्षण और समय-समय पर देखरेख करना भी है। लापरवाही के कारण यदि सरकारी वस्तु खराब होती है या नष्ट होती है, तो उसका नुकसान सीधे जनता को उठाना पड़ता है।सरकारी संपत्ति को अपनी निजी संपत्ति की तरह सुरक्षित रखना कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी की पहचान है। वहीं, जानबूझकर या लगातार लापरवाही बरतना जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जांच होगी या लीपापोती?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा? क्या खुले में पड़े सामान की सूची बनाकर उसकी स्थिति की जांच होगी? क्या पानी की टंकियों की सफाई और ढक्कन बंद कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी? या फिर निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति और लीपापोती करके मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से सवाल है कि सरकारी धन से खरीदे गए सामान को खुले में बर्बाद होने से बचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

क्या कहते हैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्रावस्ती डॉ. .के. सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगीसी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।वहीं मुख्य विकास अधिकारी शाहिद अहमद ने कहा कि यह जांच का विषय है। मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।


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